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मैट्रिक परीक्षा की कापियों का मूल्यांकन बना मजाक

एक्सक्लूसिव तस्वीर के साथ खबर
मैट्रिक परीक्षा की कापियों का मूल्यांकन बना मजाक
प्राथमिक स्कूल और प्राईवेट स्कूल के शिक्षक जांच रहे हैं कापियां
हाई स्कूल के नियोजित शिक्षक बीते एक अप्रैल से हैं धरने पर
मैट्रिक छात्र–छात्राओं के भविष्य के साथ हो रहा है खिलवाड़
शिक्षा बना मजाक
सहरसा से मुकेश कुमार सिंह की दो टूक—-
बिहार में हाई स्कूल के तमाम नियोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर बीते एक अप्रैल से धरने पर हैं ।इन्होंने मैट्रिक परीक्षा की कापियों की जांच का बहिष्कार कर रखा है ।इन शिक्षक–शिक्षिकाओं के धरने पर रहने की वजह से मैट्रिक छात्र और छात्राओं का भविष्य पूरी तरह से दांव पर लग गया है ।हमने सहरसा में कापियों के हो रहे मूल्यांकन का एक्सक्लूसिव निरीक्षण किया जिससे पुरे बिहार की स्थिति का हमें अंदाजा हुआ ।बिहार के कुछ हिस्सों को छोड़ दें,तो,मैट्रिक की परीक्षा कदाचार मुक्त हुयी ।सरकार की यह एक बड़ी कामयाबी थी,जिसका बिहार भर में बेहद सकारात्मक सन्देश भी गया ।हमसभी को लगा की बिहार के दिन अब बहुरेंगे और यहां की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से सुदृढ़ होगी ।लेकिन कदाचार मुक्त परीक्षा के बेहतर संचालन के बाद जब परीक्षार्थियों की कापियों की जांच की बारी आई,तो,सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया और तंत्र की हवा निकल गयी । राज्यभर के मैट्रिक नियोजित शिक्षक बीते एक अप्रैल से ही धरने पर हैं और उन्होंने समवेत कांपी मूल्यांकन का बहिष्कार कर दिया है ।ये सभी समान काम के लिए समान वेतन की जिद पर अड़े हैं ।यह वह समय था,जब सरकार को पुरजोर दखल देकर धरने और हड़ताल को खत्म कराना चाहिए ।लेकिन सरकार मामले के पटाक्षेप की जगह गहरी नींद में सो गयी ।आलम यह है की 13 अप्रैल से काँपियों का मूल्यांकन कार्य शुरू है ।

प्राईमरी और मिडिल स्कूल के शिक्षक इन कापियों का मूल्यांकन कर रहे हैं ।यही नहीं प्राईवेट स्कूल के भी शिक्षक कापियों का मूल्यांकन कर रहे हैं ।हद की इंतहा तो यह है की अगर कोई साधारण इंसान भी ग्रेजुएट डिग्री धारी है,तो,वह भी मूल्यांकन कार्य में जुटा हुआ है ।सबसे शर्मसार करने वाली बात यह है की जो शिक्षक अपने विद्यालय में संस्कृत और हिंदी पढ़ाते थे,वे यहां गणित और विज्ञान की कांपी जांच रहे हैं ।उर्दू के शिक्षक इतिहास और सोसल साईन्स की कापियों की जांच कर रहे हैं ।आप खुद कयास लगाएं की बिहार सरकार बच्चों के साथ कितना बड़ा अन्याय कर रही है। सहरसा में जिला स्कूल और मनोहर उच्च विद्यालय दो मूल्यांकन केंद्र बनाये गए हैं ।जिला स्कूल में करीब 90 हजार और मनोहर उच्च विद्यालय में 1 लाख 25 हजार से अधिक काँपियों का मूल्यांकन किया जा रहा है ।”अंधेर नगरी और चौपट राजा” नीतीश बाबू सियासी खेल में बच्चों को क्यों मोहरा बना रहे हैं ?आखिर कौन से गुनाह की सजा इन बच्चों को दे रहे हैं ?जिला प्रशासन ने मूल्यांकन केंद्र पर मीडिया को जाने की शख्त पाबन्दी लगा रखी है ।लेकिन हमने ना केवल एक्सक्लूसिव तस्वीर उतारी है बल्कि मूल्यांकन कार्य में जुटे शिक्षक–शिक्षिकाओं के एक्सक्लूसिव बयान भी लिए हैं ।मूल्यांकन में लगे शिक्षक–शिक्षिकाएं भी स्वीकार कर रहे हैं की बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है ।


“सिस्टम में सौ छेद”यह कहावत हमने सुनी है लेकिन यह मंजर “सिस्टम में सुराख” का है । सरकार बच्चों के भविष्य के साथ महज खिलवाड़ नहीं कर रही है बल्कि उनके मनसुख सपनों को रौंद भी रही है ।आखिर में हम ताल ठोंक कर कहते हैं की सरकार एक बड़ा गुनाह कर रही है,जिसकी सजा जनता को जरूर देना चाहिए ।

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