सहरसा टाईम्स - Saharsa Times

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में, मुंबई पुलिस पर महाराष्ट्र सरकार का अनावश्यक दबाब

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में, मुंबई पुलिस पर महाराष्ट्र सरकार का अनावश्यक दबाब

बिहार में तेजस्वी यादव की भूमिका सराहनीय, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सवालों के घेरे में

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार सिंह

दिल्ली: फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले की जाँच सीबीआई से कराई जाए, इसके लिए देश भर से आवाज उठ रही है लेकिन इस मामले को जितनी गम्भीरता से लिया जाना चाहिए, उसके लिए सियासी समाज कहीं से भी गम्भीर नहीं दिख रहा है। बिहार के गाँव और कस्बों में सीबीआई जाँच के लिए रोज आंदोलन हो रहे हैं। 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत की लाश, मुंबई के बांद्रा स्थित उनके घर से पंखे से लटकती हुई, बरामद की गई थी। शुरुआती समय में, मुम्बई पुलिस इस मौत को एक चैलेंज के रूप में ले रही थी लेकिन धीरे-धीरे मुम्बई पुलिस की जाँच आत्महत्या पर केंद्रित हो गयी। कई फिल्मी हस्तियों ने बॉलीबुड में नेपोटिज्म और कुछ परिवारों के वर्चस्व और दादागिरी पर खुलकर बयान दिए। बॉलीबुड से अंडरवर्ल्ड के कनेक्शन को लेकर भी पुरजोर बयानबाजी हुई। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी, बॉलीबुड की असली हकीकत को सामने लाने के लिए केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हुई। पूरा देश जानता है कि शिवसेना और मनसे का रवैया, बिहारियों के प्रति बेहद बुरा रहा है। दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत, बिहार के रहने वाले थे। शिवसेना के एक बड़े नेता संजय राउत का बयान बेहद शर्मनाक आया है, जिसमें उन्होंने ने कहा कि सुशांत की मौत को इतनी गम्भीरता से लेने की कोई जरूरत नहीं है। दिवंगत सुशांत के रिश्ते कई लड़कियों से थे। संजय राउत ने अपने बयान में आगे कहा कि इस मामले में, आखिर मुम्बई पुलिस कई लोगों से घण्टों क्यों बयान ले रही है? संजय राउत के इस बयान पर किसी नेता ने हमलावर बयान नहीं दिया। एक उभरते हुए कलाकार की मौत पर ऐसे बयान देने वाले नेता पर मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए था। लेकिन अभी तक सामाजिक लोग भी सामने नहीं आ रहे हैं। मुम्बई पुलिस की जाँच में रोज नई-नई बात सामने आ रही है लेकिन पुलिस जिस तरह से काम कर रही है, लग रहा है कि उसे किसी खास और बेहद चौंकाने वाले अंजाम तक पहुँचने की कोई मंसा नहीं है। भारत सरकार के किसी मंत्री ने इस घटना पर अभी तक कोई बड़ा बयान नहीं दिया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिवंगत सुशांत के बिहार के पटना स्थित घर पर जाकर अपनी हाजिरी जरूर बनाई है लेकिन उन्होंने भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया, जिससे सुशांत की मौत की सच्चाई को सामने लाने में मदद मिलती। दिवंगत सुशांत के घर भोजपुरी सिनेमा के कई कद्दावर अभिनेता और अभिनेत्री, मसलन मनोज तिवारी, पवन सिंह, खेसारी लाल यादव, अक्षरा सिंह, गुंजन सिंह वगैरह पहुँचे । हद की इंतहा है कि बॉलीबुड की एकमात्र नामचीन हस्ती नाना पाटेकर ने दिवंगत के घर जाकर, परिजनों से दर्द साझा किया। नाना पाटेकर ने कहा कि उन्हें लग रहा है कि उन्होंने अपना बेटा खोया है। सुशांत के रूप में बॉलीबुड ने एक चमकता सितारा खोया है। नाना पाटेकर ने भी सुशांत की मौत की जाँच सीबीआई से कराने की मांग की है। दिवंगत के घर जितने भोजपुरी कलाकार आये थे, सभी ने सीबीआई से इस मामले की जाँच कराने की माँग की है। बॉलीबुड की गंदगी को लेकर कंगना रानौत, पायल रहतोगी, अक्षय खन्ना, सोनू निगम, विवेक ओबरॉय, कुमार शानू ने भी खुलकर बयान दिए हैं और इस मौत मामले की जाँच सीबीआई से कराने की वकालत की है। इधर दिवंगत सुशांत के घर केरल के पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार सिंह, बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, राज्य सरकार के कई मंत्री, पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह, रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, जाप सुप्रीमों पप्पू यादव, पूर्व सांसद लवली आनंद सहित कई अन्य नेताओं ने ना केवल दिवंगत के परिजनों के घर पहुँचकर, उनके जख्मों की मरहम पट्टी करने की भरपूर कोशिश की बल्कि इस मामले की सीबीआई से जाँच कराने की माँग भी की। गौरतलब है कि जिस दिन सुशांत की मौत की खबर आई थी, सबसे पहले दिवंगत के घर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय पहुँचे थे। इसी बीच फिल्म अभिनेता शेखर सुमन भी दिवंगत के घर पहुँचे और गहरी संवेदना व्यक्त की। शेखर सुमन ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मिलना चाहा लेकिन नीतीश कुमार ने उनसे मुलाकात नहीं की। अभिनेता शेखर सुमन ने तेजस्वी यादव के साथ मिलकर सुशांत को न्याय दिलाने के लिए मोर्चा खोल दिया है। निसन्देह, तेजस्वी यादव का यह रुख, उन्हें महानायक की छवि दिलाने की सीढ़ी साबित होगी। सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने के लिए कई सामाजिक संगठन आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और वे लगातार उग्र आंदोलन भी कर रहे हैं। लेकिन बिहार से इस लड़ाई को सच्चे मन और ईमानदारी से तेजस्वी यादव और शेखर सुमन, पूर्व सांसद लवली आनंद के अलावे जाप सुप्रीमों पप्पू यादव लड़ रहे हैं। अब इनकी कोशिशों का फलाफल जो भी आये लेकिन ये लोग बिहारी होने का पूरा फर्ज निभा रहे हैं। इस पूरे मामले में सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की भूमिका, सबसे निम्न स्तर की है।
तेजस्वी यादव ने कहा है कि प्रसिद्ध अभिनेता शेखर सुमन एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के गुनाहगारों को सजा दिलाने के लिए मुहिम छेड़े हुए है। बिहारी होने के नाते हमारा उनकी इस मुहिम को पूरा समर्थन है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दिवंगत सुशांत के परिवार से मिलना चाहिए था। प्रदेश के मुखिया होने के नाते, उन्हें सीबीआई जाँच की माँग करनी चाहिए थी और उनके नाम पर निर्माणाधीन फिल्म सिटी का नामकरण करने की माँग को भी स्वीकार करना चाहिए। सुशांत सिंह राजपूत की मौत, सामान्य बात नहीं है। सुशांत ने आत्महत्या नहीं की है बल्कि उसे इस हद तक जाने पर मजबूर किया गया है। सुशांत को इंसाफ दिलाना हर बिहारी को इंसाफ दिलाने की तरह है। दिवंगत सुशांत के घर नहीं जाकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज धर्म की हत्या कर के रख दी है। अगर इस मामले में नीतीश कुमार दिलचस्पी दिखाते, तो महाराष्ट्र सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार भी गम्भीर होती। लेकिन नीतीश कुमार अपने किश्म के पत्थर दिल इंसान हैं। आखिर उनकी यह राजनीति, किनके लिए है, यह एक गम्भीर सवाल है। मोटे तौर पर, अगर इस मामले की जाँच सीबीआई से नहीं कराई गई, तो यह मामला ठंढ़े बस्ते में तो चला ही जायेगा, साथ ही बॉलीबुड के नेपोटिज्म, कुछ परिवारों के वर्चस्व, अंडरबर्ल्ड से कनेक्शन और तमाम गंदगी पर, पहले की तरह ही पर्दा पड़ा रह जायेगा और लोग सच्चाई से, कभी भी रूबरू नहीं हो पाएंगे। ऐसे में हमें, इसी तरह से कई सुशांत की मौत की खबर सुनने को मिलती रहेगी।

Exit mobile version